मार्गशीर्ष अमावस्या 2025: पितृ पूजा, विष्णु भक्ति और पूर्वजों के लिए अमूल्य दिवस
मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 को पितृ पूजा और विष्णु भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन गंगाजल स्नान, ब्राह्मण भोजन और तर्पण से पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है।
आगे पढ़ेंनमस्ते! अगर आप भारतीय धर्म‑संस्कृति की ताज़ा जानकारी चाहते हैं तो सही जगह पर आए हैं। यहाँ हम 2024‑2025 के प्रमुख त्योहार, आसान वास्तु उपाय और रोज़मर्रा की धार्मिक खबरें सरल शब्दों में बताएँगे। पढ़ते रहें, हर जानकारी आपके काम आ सकती है।
सबसे पहले बात करते हैं उन त्योहार की जो इस साल और अगले साल खास हैं। गणेश चतुर्थी 2024 का दिन 7 सितंबर है, और लोग इसे विनायक की जयकार से मनाते हैं। आप चाहें तो अपने मित्र‑परिवार को शुभकामनाओं वाला संदेश या कोई प्रेरक उद्धरण भेज सकते हैं—इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना बहुत लोकप्रिय रहता है।
बकरा ईद (ईद‑उल‑अज़हा) 2024 इस्लामिक कैलेंडर का बड़ा त्योहार है, जहाँ मुसलमान बकरी की क़ुर्बानी करके दान देते हैं। अगर आप किसी को यह त्यौहार मनाते देख रहे हैं तो उनके साथ मिलकर भोजन बाँटना या जरूरतमंदों को मदद देना एक सुंदर विचार है।
निरजला एकादशी 2024 का व्रत 18 जून को पड़ता है। इस दिन उपवास रख कर लोग विष्णु और लक्ष्मी माँ की कृपा चाहते हैं। आप अगर इसे घर में मनाते हैं तो सरल पूजा सामग्री जैसे फल, दीपक और पवित्र पानी तैयार रखें—यह प्रक्रिया आसान है और परिवार के साथ मिलकर करने में मज़ा आता है।
नया साल आते ही बहुत से लोग अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने की सोचते हैं। वास्तु के अनुसार, छोटा हनुमान जी का मूर्ति, गोलाकार चक्र (गोमती चक्र), चावल के दानों का छोटा डिब्बा और लाल धागा को प्रवेश द्वार या शयनकक्ष में रखना लाभकारी माना गया है। इन चार चीज़ों से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और धन‑सम्पदा की दिशा में मदद मिलती है।
इन वस्तुओं को रखने से पहले जगह साफ रखें, हल्की सफेद कपड़ा छिलाकर रख दें और रोज़ एक छोटा मंत्र पढ़ें—जैसे “ॐ हनुमते नमः”。 इससे घर का माहौल ताज़गी भरा रहेगा और नई ऊर्जा आएगी।
वास्तु टिप्स को अपनाते समय ज़रूरी है कि आप अपनी सुविधा के अनुसार बदलाव करें, बहुत महँगा या जटिल कुछ न खरीदें—छोटी-छोटी चीज़ें ही काफी होती हैं।
इस पेज पर हम लगातार नई खबरें और उपयोगी सुझाव जोड़ते रहेंगे। यदि आपको कोई विशेष त्योहार या टिप्स चाहिए तो कमेंट में लिखिए, हम जल्द से जल्द उत्तर देंगे। धन्यवाद!
मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 को पितृ पूजा और विष्णु भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन गंगाजल स्नान, ब्राह्मण भोजन और तर्पण से पूर्वजों की आत्माओं को शांति मिलती है।
आगे पढ़ेंNavratri 2025 के चौथे दिन (25 सितम्बर) को माँ कुशमांडा की पूजा होती है। इस दिन पीले‑ऑरेंज रंग, शाकाहारी भोग और विशेष रूप से लौकी का हलवा प्रमुख होते हैं। अभिजीत मुहूर्त में पुजा करने से मन‑शरीर को ऊर्जा मिलती है। ग्रीष्म‑ज्योतिष के अनुसार माँ का संबंध बुध ग्रह से है।
आगे पढ़ेंराजस्थान सरकार ने वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना 2025 के लॉटरी परिणाम घोषित किए। कुल 23,974 वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त यात्रा का मौका मिला, जिसमें 21,405 रेल द्वारा और 2,569 हवाई मार्ग से जाएंगे। जयपुर जिले में 4,905 चयनित, 526 काठमांडू के पशुपतिनाथ को हवाई सफर करेंगे। योजना में भारत के प्रमुख तीर्थस्थल और पहली बार वागाह बॉर्डर जैसे राष्ट्रीय स्थल भी शामिल हैं।
आगे पढ़ेंनए साल 2025 के लिए वास्तु के अनुसार धन और समृद्धि को आकर्षित करने के लिए आपके पर्स में चार महत्वपूर्ण वस्तुएं रखने की सलाह दी गई है। ये हैं छोटा हनुमान की मूर्ति, गोमती चक्र, कुछ चावल के दाने, और एक लाल धागा। ये वस्तुएं सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संपत्ति के प्रतीक मानी जाती हैं। वास्तु सिद्धांतों का पालन कर लोग साल भर में सकारात्मक ऊर्जा और धन आकर्षित कर सकते हैं।
आगे पढ़ेंगणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है और इसे धूमधाम से भारत और विदेशों में मनाया जाता है। 2024 में, गणेश चतुर्थी 7 सितम्बर को है। इस अवसर पर अपने प्रियजनों के साथ शुभकामना संदेश, उद्धरण, और चित्र साझा करें।
आगे पढ़ेंबकरीद, जिसे ईद-अल-अधा भी कहा जाता है, इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है। इसका महत्व पैगंबर इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल से जुड़ी बलिदान की कहानी में निहित है। इस दिन को मुसलमान बकरे की कुरबानी देकर, परिवार, दोस्तों और गरीबों में मांस बांटकर मनाते हैं। यह त्योहार बिहार और पूरे भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
आगे पढ़ेंनिर्जला एकादशी, जो ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है, 2024 में 18 जून को मनाई जाएगी। इस व्रत का पालन बिना भोजन और पानी के 24 घंटे के कठिन उपवास के रूप में किया जाता है। यह व्रत उन सभी 24 एकादशियों के उपवास का पुण्य प्रदान करता है और श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की अपार कृपा का कारण बनता है।
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