सीपीआई (एम) क्या है? इस महीने की महंगाई दर को समझें

जब भी समाचार चैनल या अखबार में ‘महंगाई बढ़ी’ लिखा दिखे, तो अक्सर पीछे का आँकड़ा सीपीआई (एम) होता है। यह शब्द थोड़ा तकनीकी लग सकता है, पर असल में इसका मतलब बहुत साधा है – रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों का औसत बदलाव। सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ इस डेटा को देखकर तय करते हैं कि मौद्रिक नीति कैसे बनानी चाहिए। तो चलिए जानते हैं इसे कैसे निकाला जाता है और आपका बजट किस तरह प्रभावित हो सकता है।

सीपीआई (एम) कैसे निकालते हैं?

सरकार हर महीने कई शॉपिंग स्पॉट्स – बाज़ार, सुपरमार्केट, ऑनलाइन स्टोर – से 200‑250 सामानों और सेवाओं के दाम इकट्ठा करती है। इन आइटम में चावल, दूध, कपड़े, किराना, ट्यूशन फीस आदि शामिल होते हैं। फिर प्रत्येक वस्तु का वज़न तय किया जाता है, क्योंकि कुछ चीज़ें हमारे खर्च में ज्यादा असर डालती हैं (जैसे तेल) और कुछ कम (जैसे साबुन)। इन सबको जोड़कर एक औसत मूल्य सूचकांक बनाया जाता है, जिसे हम सीपीआई (एम) कहते हैं।

आपकी ज़िन्दगी पर इसका असर क्या?

अगर इस महीने का सीपीआई 5% बढ़ा, तो इसका मतलब है कि आप जो सामान रोज़ खरीदते हैं, उसकी कीमत औसतन 5% महँगी हो गई है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं; ये अंक आपके घर की बजट में सीधे जुड़ते हैं – किराने के बिल से लेकर स्कूल फीस तक। इससे बचत योजना भी बदल सकती है क्योंकि बैंक अक्सर इस आंकड़े को देखकर ब्याज दरें तय करते हैं। इसलिए सीपीआई (एम) को नजर में रखना फायदेमंद रहता है, खासकर अगर आप घर चलाते हैं या छोटे व्यवसाय चलाते हैं।

सीपीआई के अलावा कई अन्य सूचकांक भी होते हैं, जैसे रिटेल प्राइस इन्डेक्स (RPI) और हार्डली इंडेक्स, पर आम जनता के लिए सीपीआई सबसे आसान समझ में आता है क्योंकि यह सीधे आपके खर्च से जुड़ा होता है। अक्सर आर्थिक समाचार साइटें इस डेटा को ग्राफ़ में दिखाती हैं; आप इसे देखकर जल्दी देख सकते हैं कि कौन‑सी चीज़ों की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं और कहाँ पर स्थिरता है।

यदि आप अपनी व्यक्तिगत खर्च योजना बनाते समय सीपीआई (एम) का उपयोग करना चाहते हैं, तो सबसे पहले पिछले 12 महीनों के डेटा को देखें। इससे आपको पता चलेगा कि महंगाई में मौसमी उतार‑चढ़ाव कैसे होते हैं – जैसे बारिश वाले महीने में फल की कीमतें बढ़ती हैं और सर्दियों में गैस की दर घटती है। इन पैटर्न को समझकर आप खरीदारी का समय बेहतर चुन सकते हैं, जिससे आपके पैसे की ताकत बनी रहती है।

सीपीआई (एम) के डेटा को सरकारी पोर्टल या प्रमुख आर्थिक समाचार साइटों पर मुफ्त में देखा जा सकता है। अगर आप इसे रोज़ देखना चाहते हैं तो एक आसान तरीका यह है कि अपने फ़ोन पर ‘CPI’ अलर्ट सेट कर लें, जिससे नई रिपोर्ट आने पर तुरंत सूचन मिल जाएगी। इससे आपको हर महीने की महंगाई के बारे में ताज़ा जानकारी मिलेगी और आप अपनी वित्तीय योजना को उसी हिसाब से अपडेट रख पाएँगे।

संक्षेप में, सीपीआई (एम) सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि आपके रोज़मर्रा के खर्चों का दर्पण है। इसे समझकर आप बेहतर बजट बना सकते हैं, बचत की रणनीति तय कर सकते हैं और आर्थिक बदलावों से पहले ही तैयार हो सकते हैं। अगली बार जब कोई ‘महंगाई बढ़ी’ कहे, तो याद रखें कि पीछे का नंबर वही सीपीआई (एम) है जो आपकी जेब को सीधे प्रभावित करता है।

सित॰, 11 2024
सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी एम्स दिल्ली में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं

सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी एम्स दिल्ली में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं

सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी की स्थिति गंभीर है और वे दिल्ली के एम्स में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। उन्हें 19 अगस्त को उच्च बुखार के कारण आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। बाद में उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों की एक बहु-विषयक टीम उनकी स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रही है।

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