सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी एम्स दिल्ली में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं

सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी एम्स दिल्ली में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं सित॰, 11 2024

सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी एम्स दिल्ली में वेंटिलेटर सपोर्ट पर

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी वर्तमान में दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। 72 वर्षीय येचुरी की हालत काफी गंभीर है और डॉक्टरों की एक बहु-विषयक टीम उनकी स्थिति की कड़ी निगरानी कर रही है।

सीताराम येचुरी को 19 अगस्त को उच्च बुखार के कारण एम्स के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। शुरू में उन्हें सामान्य देखभाल में रखा गया था, लेकिन बाद में उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं होते देख उन्हें गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में शिफ्ट कर दिया गया। वहाँ, डॉक्टरों ने पाया कि येचुरी एक गंभीर ऊपरी श्वसन पथ संक्रमण से ग्रस्त हैं, जो उनकी गंभीर स्थिति का मुख्य कारण है।

हाल की स्वास्थ्य समस्याएं

हाल ही में, येचुरी ने मोतियाबिंद की सर्जरी करवाई थी, लेकिन उनकी इस सर्जरी के बाद उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति कमजोर हो गई। इस सर्जरी के बावजूद, येचुरी सोशल मीडिया पर सक्रिय बने रहे। उन्होंने 22 अगस्त को पूर्व पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को श्रद्धांजलि देते हुए एक छह मिनट का वीडियो पोस्ट किया था।

अगस्त महीने में सक्रिय रहते हुए, येचुरी ने जम्‍मू और कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, और सीपीआई (एम) के साथ एकजुटता व्यक्त की। हालांकि, उनकी हालत खराब होने के बाद से उनके सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर उनकी सक्रियता में कमी आई है, जिसका अंदाजा उनके आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट से लगाया जा सकता है जो 29 अगस्त को अब्दुल गफूर नूरानी को श्रद्धांजलि देने के समय किया गया था।

निजी और राजनीतिक जीवन

सीताराम येचुरी का राजनीतिक जीवन काफी सक्रिय और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 1974 में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) में शामिल होकर अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की। 1992 में वे सीपीआई (एम) पोलितब्यूरो के सदस्य बने और 2005 से 2017 तक पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया।

येचुरी ने 1996 में यूनाइटेड फ्रंट सरकार के लिए सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम के निर्माण के दौरान पी चिदंबरम के साथ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, 2004 में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस सरकार की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही।

परिवार और समर्थन

सीताराम येचुरी के परिवार ने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से उनकी अच्छी स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने की अपील की है। सीपीआई (एम) के सदस्यों और अन्य सहयोगियों ने भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि येचुरी की हालत बेहद नाजुक है और अगले कुछ दिन उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और उनकी निगरानी लगातार की जा रही है।

निष्कर्ष

सीताराम येचुरी का स्वास्थ्य स्थिति उनके समर्थकों और पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। उनकी राजनीतिक सक्रियता और नेतृत्व ने उन्हें भारतीय राजनीति में एक अहम स्थान दिलाया है, और उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए देशभर से प्रार्थनाएं की जा रही हैं।

7 टिप्पणि

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    vikram yadav

    सितंबर 11, 2024 AT 09:29

    येचुरी साहब की हालत बहुत गंभीर है... एम्स की टीम जो भी कर रही है, उसकी तारीफ करनी पड़ती है। लेकिन ये देखकर लगता है कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था अभी भी बहुत असमान है-अगर ये कोई आम आदमी होता, तो क्या इतनी तुरंत इंटेंस केयर मिलती? ये सवाल अभी भी बाकी है।

    मैंने 2017 में उनकी राज्यसभा की बहस सुनी थी-एक ऐसा वक्ता जिसकी बात पर लोग चुप रह जाते थे। अब वो बस एक मशीन पर निर्भर हैं... ये दुखद है।

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    Tamanna Tanni

    सितंबर 13, 2024 AT 03:45

    देश के लिए बहुत बड़ी हानि होगी अगर वो नहीं बच पाए। 🙏

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    Rosy Forte

    सितंबर 14, 2024 AT 09:08

    असल में, यह सिर्फ एक व्यक्तिगत बीमारी का मुद्दा नहीं है-यह भारतीय बुद्धिजीवी परंपरा के अंतिम अवशेषों की लड़ाई है। येचुरी एक विचारक थे, न कि एक राजनेता। उनकी शारीरिक कमजोरी एक राजनीतिक असंगति का प्रतीक है: जहाँ निर्णय अब ट्वीट्स और ट्रेंड्स से लिए जाते हैं, न कि दर्शन और विश्लेषण से।

    उनके अनुयायी उनके लिए प्रार्थना कर रहे हैं, लेकिन क्या कोई उनके विचारों के लिए भी प्रार्थना कर रहा है? क्या हमारी संस्कृति अब तक ऐसे व्यक्तियों को बरकरार रखने के लिए तैयार है? या हम सिर्फ उनके नाम को याद करने के लिए तैयार हैं?

    एम्स के डॉक्टर जितना भी कर रहे हैं, वह अभी भी एक तंत्र की लापरवाही के बाद एक अंतिम प्रयास है। जब तक हम नेतृत्व को एक व्यक्ति के शरीर पर निर्भर नहीं कराते, तब तक यह चक्र बरकरार रहेगा।

    उनके अंतिम पोस्ट में नूरानी के लिए श्रद्धांजलि थी-लेकिन क्या हम उनके विचारों को भी श्रद्धांजलि दे पाएंगे? या हम सिर्फ एक चित्र और एक ट्वीट बनाकर उनकी याद में अपनी निष्क्रियता को छिपाएंगे?

    यह एक व्यक्ति की बीमारी नहीं, यह एक सभ्यता की असमर्थता है।

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    Yogesh Dhakne

    सितंबर 15, 2024 AT 02:17

    ये बात दिल तोड़ देती है। येचुरी साहब ने हमेशा बात की थी बिना शोर के।

    उनके लिए दुआ है। बस यही। 😔

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    kuldeep pandey

    सितंबर 17, 2024 AT 00:52

    अरे भई, ये सब तो बस एक नाटक है। देखो न, अभी तक किसी ने ये नहीं पूछा कि एम्स के डॉक्टर इतने दिनों तक क्यों नहीं ठीक कर पाए? अगर ये कोई बिजनेसमैन होता, तो उसे अमेरिका भेज दिया जाता।

    अब लोग प्रार्थना कर रहे हैं... बस इतना ही? क्या ये देश का राजनीतिक स्वास्थ्य नहीं बदल रहा? जब तक हम लोगों को एक व्यक्ति पर निर्भर रहने देंगे, तब तक ये सब चलता रहेगा।

    और हां, उनके आखिरी पोस्ट का टाइमस्टैम्प बिल्कुल अजीब है... 29 अगस्त? जबकि उनकी हालत 25 से बिगड़ रही थी। क्या कोई ने उनके अकाउंट को एक और आदमी ने चलाया? ये सब बहुत शक्तिशाली है।

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    Hannah John

    सितंबर 17, 2024 AT 05:23

    सुनो ये सब बकवास है बस एक बड़ा फेक न्यूज़ अभियान है जो एक बड़ी जनता को भ्रमित करने के लिए बनाया गया है।

    येचुरी अभी भी अपने घर पर हैं और ये सब एक राजनीतिक ट्रिक है जिसके जरिए चुनाव के लिए भावनाएं बढ़ाई जा रही हैं। एम्स के डॉक्टरों को कोई नहीं जानता कि वो वहां हैं-क्योंकि वो वहां नहीं हैं।

    अगर आप उनके वीडियो को ध्यान से देखें तो उनकी आवाज़ में एक अजीब रिवर्स इफेक्ट है... जैसे ऑडियो को मैन्युअली एडिट किया गया हो।

    और फिर ये श्रद्धांजलि वाला बार-बार आना? बहुत शक्तिशाली राजनीति है।

    मैंने एक एक्स-एम्स स्टाफ मेंबर को जानता है जिसने कहा कि उनका बेड खाली है।

    ये बस एक बड़ा गुमनामी अभियान है जो एक लोकप्रिय नेता के नाम पर चल रहा है।

    क्या आप वाकई यकीन करते हैं कि एक 72 साल का आदमी जिसकी तबीयत इतनी खराब है, वो अपने फोन से वीडियो बनाता है? ये तो एक बच्चे की बात है।

    मैंने यह बात एक फ्रीलांस जर्नलिस्ट को बताई थी जिसने कहा कि ये एक ऐसा ऑपरेशन है जिसका बजट 20 करोड़ है।

    अब आप बताइए-क्या आप वाकई इस पर विश्वास करते हैं?

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    dhananjay pagere

    सितंबर 17, 2024 AT 21:19

    बस एक बात समझो... जब तक आप एक इंसान को राजनीति का देवता नहीं बनाते, तब तक ऐसी चीजें नहीं होतीं।

    येचुरी एक नेता थे। लेकिन उनकी ताकत उनके विचारों में नहीं, बल्कि उनके अनुयायियों के आत्मविश्वास में थी।

    अब जब वो बीमार हैं, तो उनके लोग बेचारे हैं-उनका सारा भरोसा एक शरीर पर लगा था।

    हमें ऐसे लोगों को देवता नहीं, बल्कि इंसान बनना चाहिए।

    इसलिए जब वो नहीं रहेंगे, तो उनके लोग अकेले रह जाएंगे।

    ये बहुत दुखद है।

    और हां... वो वीडियो जो बुद्धदेव भट्टाचार्य के लिए डाला गया था-उसमें उनकी आवाज़ थोड़ी फीकी थी।

    मैंने उसे 3 बार सुना।

    वो बीमार थे।

    और हम सब ने इसे देखा।

    लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।

    😢

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