नैस्डैक (Nasdaq) का आसान गाइड
अगर आपने कभी शेयर बाजार की खबर देखी है तो "नैस्डैक" शब्द आपको मिला होगा. लेकिन यह असल में क्या है, कैसे काम करता है और हमें क्यों परवाह करनी चाहिए? चलिए इसे साधारण भाषा में समझते हैं.
नैस्डैक कैसे काम करता है?
नैस्डैक एक इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंज है जहाँ सभी ट्रेडिंग कंप्यूटर सिस्टम के ज़रिये होती है, फिजिकल ट्रेडिंग फ्लोर नहीं. यहाँ की सबसे बड़ी बात यह है कि इस मार्केट में ज्यादातर टेक कंपनियों के शेयर लिस्ट होते हैं – जैसे Apple, Amazon, Google (Alphabet) और Microsoft.
जब कोई कंपनी अपने शेयर बेचती या खरीदती है, तो कीमतें रियल‑टाइम में बदलती रहती हैं. ये बदलाव सप्लाई‑डिमांड पर निर्भर करते हैं. अगर किसी स्टॉक की मांग बढ़े तो उसका दाम ऊपर जाएगा, वर्ना नीचे गिर सकता है.
नैस्डैक का मुख्य इंडेक्स "Nasdaq Composite" 3000 से ज्यादा कंपनियों को शामिल करता है. इस इंडेक्स में हर कंपनी का वजन उसके मार्केट कैप के हिसाब से तय होता है, इसलिए बड़ी टेक फर्मों की छोटी फर्मों पर ज़्यादा असर पड़ता है.
भारत में निवेशकों के लिए टिप्स
बहुत सारे भारतीय निवेशक अब सीधे या इन्डेक्स फ़ंड के जरिए नैस्डैक में पैसा लगाते हैं. अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करें – क्या आप दीर्घकालिक वृद्धि चाहते हैं या अल्पकालिक ट्रेडिंग?
इंडिया से अमेरिकी शेयर खरीदने का आसान तरीका है: भारतीय ब्रोकरों के साथ लिंकेज अकाउंट खोलें, जैसे Zerodha, Groww या Upstox. ये प्लेटफ़ॉर्म US‑stocks की सुविधा देते हैं और रेज़िस्टेंस कम रखते हैं.
ध्यान रखें कि डॉलर में निवेश करने पर आपको विनिमय दर का जोखिम भी झेलना पड़ेगा. अगर रूपया मजबूत रहता है तो आपके लाभ बढ़ेंगे, वरना उल्टा हो सकता है. इसलिए कभी‑कभी हेजिंग या डॉलर्स को बचाने के लिए छोटे‑छोटे टाइम‑फ़्रेम में निवेश करना समझदारी होती है.
एक और बात – नैस्डैक पर टेक कंपनियों की कीमतें अक्सर न्यूज़ से प्रभावित होती हैं. नया प्रोडक्ट लॉन्च, एप्पल का iPhone या गूगल का AI अपडेट देख कर शेयर तेज़ी से ऊपर‑नीचे हो सकते हैं. इसलिए मार्केट खबरों को रोज़ पढ़ना फायदेमंद रहेगा.
अंत में यह याद रखें कि कोई भी निवेश 100% सुरक्षित नहीं होता. हमेशा अपना पोर्टफ़ोलियो विविध बनाएं – सिर्फ टेक नहीं, बल्कि हेल्थकेयर या कंज्यूमर गुड्स के शेयर भी रखें. इस तरह एक सेक्टर की गिरावट से आपका पूरा पैसा जोखिम में नहीं पड़ता.
तो अब जब आप नैस्डैक को समझते हैं तो अगली बार खबरों में देखेंगे कि कौन सी कंपनी ने नई ऊँचाई छुई या किसे गिरावट का सामना करना पड़ा. यही जानकारी आपको सही टाइम पर खरीद‑बेच करने में मदद करेगी.