GST काउंसिल: हर भारतीय के लिए जरूरी टैक्स अपडेट

क्या आपने सुना है कि GST काउंसिल ने अभी‑अभी कुछ बड़ी चीज़ बदल दी? अगर आप व्यापारी हैं या साधारण करदाता, तो इन बदलावों को जानना आपके खर्चे और लाभ दोनों पर असर डाल सकता है। इस लेख में हम सरल भाषा में बताएँगे कि GST काउंसिल क्या करती है, कौन-कौन सदस्य हैं और हाल के फैसले क्यों महत्वपूर्ण हैं।

GST काउंसिल की संरचना और कामकाज

GST काउंसिल एक ऐसी संस्था है जहाँ केंद्र और सभी राज्य सरकारें मिलकर जीएसटी से जुड़े नियम तय करती हैं। इसमें वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग और प्रत्येक राज्य के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। ये लोग हर त्रैमासिक मीटिंग में टैक्स दर, छूट और विशेष प्रावधानों पर चर्चा करते हैं।

काउंसिल का मुख्य काम दो चीज़ें है: पहला, विभिन्न वस्तुओं‑सेवाओं की कर दर तय करना; दूसरा, किसी नई नीति के लिए नियम बनाना या मौजूदा नियम में बदलाव लाना। क्योंकि जीएसटी एक ही राष्ट्रीय टैक्स प्रणाली है, इसलिए सभी राज्यों को इस पर सहमति बनानी पड़ती है – यही काउंसिल का काम है.

हाली में किए गए प्रमुख फैसले

पिछले साल काउंसिल ने तीन बड़े कदम उठाए:

  • भोजन और पेय पदार्थों पर 5% की न्यूनतम दर लागू कर दी, जिससे रेस्टोरेंट और किराना दुकानों को फायदा हुआ।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे लैपटॉप और मोबाइल फोन पर 12% की विशेष दर रखी, ताकि टेक‑स्मार्ट लोग महँगी कीमतों से बचें.
  • छोटे व्यवसायों के लिए वार्षिक टर्नओवर ₹40 लाख तक का इनपुट टैक्स क्रेडिट सीमित कर दिया, जिससे छोटे उद्यमियों को तुरंत नकद मिल सके।

इन बदलावों ने बाजार में कीमतें स्थिर रखने और छोटे व्यापारियों की cash‑flow सुधारने में मदद की। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी कुछ वस्तुओं पर कम टैक्स मिलने से राहत मिली.

काउंसिल अक्सर मौसमी या विशेष स्थितियों के लिए अस्थायी छूट देती है – जैसे महामारी के दौरान स्वास्थ्य सामानों पर 0% दर या पर्यटन सीज़न में होटल सेवाओं पर रियायत। इन खबरों को ध्यान से फॉलो करना जरूरी है, क्योंकि एक छोटी‑सी जानकारी आपके बिल को घटा सकती है.

यदि आप खुदरा व्यवसाय चला रहे हैं तो GST पोर्टल पर काउंसिल के नवीनतम नोटिफ़िकेशन देखना न भूलें। अक्सर नई दरों की घोषणा आधे साल में दो बार होती है, और हर बदलाव का असर आपके इनवॉइसिंग सॉफ्टवेयर में तुरंत दिखता है.

सारांश में, GST काउंसिल वह प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर टैक्स नीति तय होती है। इसके फैसले सीधे आपकी खरीद‑बिक्री, मूल्य निर्धारण और कर रिटर्न पर असर डालते हैं। इसलिए नियमित अपडेट पढ़ें, अपने अकाउंटेंट से सलाह लें और जब भी नई दरें आएँ तो अपनी प्राइसिंग स्ट्रेटेजी को तदनुसार बदलें.

मई, 21 2025
GST काउंसिल ने 2000 रुपये से कम डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 18% टैक्स पर फैसला टाला, पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियां राहत में

GST काउंसिल ने 2000 रुपये से कम डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 18% टैक्स पर फैसला टाला, पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियां राहत में

GST काउंसिल ने 2000 रुपये से कम के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 18% टैक्स लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। ये मुद्दा फिटमेंट कमिटी के पास भेजा गया है। साथ ही हेलिकॉप्टर सर्विसेज पर GST घटाकर 5% कर दी गई है।

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