गणेश चतुर्थी – कब है, क्यों खास है और कैसे मनाएँ?
गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद महीने की चौथी तिथि को आती है. इस दिन बापू को घर‑घर में झटपट लड्डू‑बर्फी बनाकर पूजन किया जाता है. भारत के कई हिस्सों में यह छुट्टी जैसा महसूस होता है, खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में.
तारीख और ज्योतिषीय कारण
2025 में गणेश चतुर्थी 21 अगस्त को पड़ेगी. इस दिन शनि‑गुरु की विशेष स्थिति बापू के सुख‑समृद्धि को बढ़ाती है. लोग अक्सर इस दिन नई शुरुआत करने, व्यापार खोलने या घर का नवीनीकरण करवाने का सोचते हैं.
घर में पूजा कैसे करें?
सबसे पहले साफ़-सफ़ाई करिए और बापू की मूर्ति या चित्र लगाइए. फिर हल्दी‑सिंदूर, चंदन, नारियल और मोती के साथ शिंगारें. लड्डू, स्नेक्स और मिठाई रखिए; ये बापू को खुश करेंगे. अगर आपके पास नहीं है तो कागज़ पर भी बापू बनाकर पूजन चल सकता है.
पुजा में गाने बहुत ज़रूरी हैं – "जय गणेश जय रक्षा करनहार" या "वंदे मातरम्" के साथ ध्वनि माहोल को ऊर्जावान बनाता है. ध्यान रखें कि जल, पान और मोदक का प्रयोग सही मात्रा में हो, ताकि बापू प्रसन्न रहें.
भक्तों का मानना है कि इस दिन दान‑धर्म से भी बड़े फल मिलते हैं. आप अनाथ आश्रम या वृद्धाश्रम में भोजन वितरित कर सकते हैं. छोटा सा दान भी आपके जीवन में खुशियाँ लेकर आता है.
अगर बाहर जाना चाहते हैं तो शहर के मुख्य गणेश मंदिरों की लिस्ट देखिए. मुंबई का महालक्ष्मी, पुणे का शिरडी या दिल्ली का पेरिस रोड पर बड़े कार्यक्रम होते हैं. अक्सर इन जगहों पर संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक शो भी होते हैं – बच्चों को साथ ले जाने में मज़ा आता है.
आजकल सोशल मीडिया पर #GaneshChaturthi टैग से लोग अपने समारोह शेयर करते हैं. आप भी अपनी फोटो या वीडियो अपलोड करके दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं. याद रखें, सुरक्षित रहने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों में मास्क और सैनिटाइज़र रखना ज़रूरी है.
कुल मिलाकर गणेश चतुर्थी सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि परिवार‑दोस्तों के साथ जुड़ने का एक मौका है. इस साल की तिथि याद रखें, तैयारियाँ पहले से शुरू करें और बापू को खुशी‑खुशी स्वागत करें.