बिजली ट्रैक्शन सिस्टम अपग्रेड – क्या बदल रहा है?
अगर आप अक्सर ट्रेन से यात्रा करते हैं तो शायद आपने ध्यान दिया हो कि कुछ रूट्स पर नई लाइटें, तेज़ गति और कम शोर सुनाई देता है। यह सब "बिजली ट्रैक्शन सिस्टम अपग्रेड" का नतीजा है। पुराने पावर सिस्टम को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल से बदलने से ट्रेन चलाना ज़्यादा कुशल हो जाता है।
अपग्रेड की जरूरत क्यों?
परम्परागत DC ट्रैक्शन अब 25 kV AC के मुकाबले कम पावर देता है, इसलिए ट्रेन का एक्सेलेरेशन धीमा रहता है। साथ ही पुरानी सर्किट्स में ऊर्जा नुकसान बहुत अधिक होता है। नई तकनीकें इन नुकसानों को घटाकर बिजली बिल भी बचाती हैं और कार्बन उत्सर्जन को कम करती हैं। यही कारण है कि भारतीय रेलवे ने 2020 के बाद से बड़े पैमाने पर अपग्रेड शुरू किया है।
मुख्य बदलाव क्या हैं?
1. इंवर्टर‑आधारित मोटर्स – ये मोटर्स तेज़ प्रतिक्रिया देती हैं, इसलिए ट्रेनों की टॉप स्पीड 130 km/h से 160 km/h तक बढ़ सकती है।
2. डिजिटल सिग्नलिंग – रियल‑टाइम डेटा के आधार पर पावर सप्लाई को कंट्रोल किया जाता है, जिससे ट्रेनों का ब्रेक लगना और तेज़ी से शुरू होना आसान हो जाता है.
3. रेजेनरेटिव ब्रेकिंग – जब ट्रेन धीमी होती है तो मोटर फिर जेनरेटर बनकर बिजली को ग्रिड में वापस भेज देती है, जिससे ऊर्जा बचत 15‑20% तक पहुँचती है.
इन बदलावों से यात्रियों को कम यात्रा समय, साइलेंट राइड और बेहतर सुविधाएँ मिलती हैं। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली–हाथीगढ़ एक्सप्रेस ने अपग्रेड के बाद अपनी औसत गति में 25 km/h की बढ़ोतरी देखी है।
अब सवाल यही बचता है – ये अपग्रेड कब पूरी तरह लागू होंगे? भारतीय रेलवे का लक्ष्य 2028 तक मुख्य ट्रैक पर सभी इलेक्ट्रिक लाइनें AC‑30 kV सिस्टम पर ले आना है। इसके साथ ही लघु रूट्स और मेट्रो नेटवर्क में भी समान तकनीक अपनाई जाएगी।
यदि आप इस प्रक्रिया को फॉलो करना चाहते हैं तो रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, प्रेस रिलीज़ या IRCTC पोर्टल पर अपडेट चेक कर सकते हैं। कई बार स्थानीय समाचार चैनलों में भी नई तकनीक के डेमो दिखाए जाते हैं – वो देखना न भूलें.
अपग्रेड की चुनौतियों को भी नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता। पुरानी पावर ग्रिड का रीफ़ॉर्म, तकनीकी प्रशिक्षण और फंडिंग की कमी प्रमुख समस्याएँ हैं। लेकिन सरकार ने विशेष बजट के तहत 1.5 खरब रुपये इस काम में लगाते हुए गति बढ़ा दी है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि "बिजली ट्रैक्शन सिस्टम अपग्रेड" सिर्फ तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि आपके रोज़मर्रा की यात्रा को आसान बनाने का वादा है। जब अगली बार ट्रेन में बैठें तो इन बदलावों को महसूस करें और समझें कि किस तरह ऊर्जा बचत, तेज़ गति और कम शोर एक साथ हो रहा है।