मुहर्रम – इस पवित्र महीने की पूरी जानकारी
जब भी हिज़री कैलेंडर में नया साल शुरू होता है, तो सबसे पहले मुहर्रम का महीना आता है. यह महीना मुस्लिमों के लिए खास माना जाता है क्योंकि इसे नव वर्ष और इमरान‑उल‑मुशरिकी (सत्ता की सिफ़त) से जोड़ा जाता है। अगर आप इस महीने में क्या हो रहा है, कैसे मनाया जाता है या कब शुरू होता है – सब जानना चाहते हैं, तो ये लेख आपके लिए है.
मुहर्रम का इतिहास और महत्व
हिज़री कैलेंडर की शुरुआत 622 ईस्वी में हुई जब नबियों ने मक्का से मेदीना को प्रवास किया। इस साल के पहले महीने को मुहर्रम कहा गया. इस महीने में कई अहम घटनाएँ हुईं, जैसे कि कर्बला का रक्तपात (अशूरा) और हज की तलीका यात्रा की शुरुआत. शिया समुदाय इन घटनाओं को बड़े धूमधाम से याद करता है, जबकि सुन्नी मुस्लिम इसे नए साल के रूप में देखते हैं.
मुहर्रम को अक्सर ‘इमरान‑उल‑मुशरिकी’ कहा जाता है क्योंकि इस महीने में ईश्वर ने अपने रजत (सूर्य) को शासक बनाया था. लोग इस बात पर भरोसा रखते हैं कि यह महीना नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक ताजगी लाता है.
आज के समय में मुहर्रम की परम्पराएँ
भारत में हर साल मुहर्रम को कई तरह से मनाया जाता है. उत्तर भारत में लोग सुबह‑सुबह इफ्तार (भोजन) से पहले नाश्ते के साथ सादे पानी का सेवन करते हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों में खास मिठाईयाँ बनती हैं. कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में ‘अज़ान-ए‑मुहर्रम’ की ध्वनि हर मोर्चे पर गूंजती है.
अगर आप शिया समुदाय के करीब रहते हैं तो आशुरा वाले दिन विशेष झांकियों, मारहल्लों और रात्रि उपवास का पालन देखा जा सकता है. कुछ जगहें ‘जालंधर’ (तिरंगा) को जलाकर इमरान‑उल‑मुशरिकी की खुशी में शोर शराबा करती हैं.
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इस महीने की सबसे बड़ी बात है – लोगों का आपसी जुड़ाव. चाहे वह मस्जिद में नमाज़ हो या घर में पारिवारिक भोजन, मुहर्रम हमें याद दिलाता है कि एक नई शुरुआत सबके साथ मिलकर करनी चाहिए.