ईद-अल-अधा: क्या है, कब है और कैसे मनाते हैं?

हर साल मुस्लिम समुदाय बड़े उत्साह से ईद‑अल‑अधा मनाता है। इस त्यौहार को "बलीदान की ईद" भी कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य मकसद क़ुरआन में दिये गये हज के समय इब्राहिम (अ.स.) ने अपने बेटे की कुर्बानी देने की तत्परता को याद करना है। अगर आप पहली बार इस ईद को देख रहे हैं, तो नीचे दी गई आसान बातें मददगार होंगी।

ईद‑अल‑अधा का महत्व और इतिहास

हज के दौरान जब इब्राहिम (अ.स.) ने अपने बेटे इस्माइल (अ.स.) को अल्लाह की आज़माइश समझ कर कुर्बान करने की इच्छा जताई, तो अल्लाह ने उनका इरादा सराहा और एक मेँढक भेजा। यह घटना ईद‑अल‑अधा के रूप में याद रखी जाती है। इस दिन मुसलमान अपने घर‑परिवार में क़ुरबानी करते हैं, लेकिन ज़्यादातर लोग जानवर (भेड़, बकरी या गैंडा) की कुर्बान चुनते हैं।

ईद की तैयारियाँ: नमाज़, खाना और दान

इद‑अल‑अधा की सुबह पहले से तय समय पर इफ्तार (सुबह का भोजन) के बाद विशेष नमाज़ पढ़ी जाती है। इस नमाज़ को ईदगाह या खुले मैदान में जमा होकर अदा किया जाता है। फिर कुर्बानी का काम शुरू होता है—भेड़, बकरी या गैंडा काटा जाता है और मांस को तीन भागों में बाँटा जाता है: एक खुद के लिए, एक रिश्तेदारों के लिये और एक ज़रूरतमंदों के लिये। इस तरह हर कोई खाने‑पिणे की खुशी का हिस्सा बनता है।

यदि आप पहली बार ईद‑अल‑अधा की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ सरल टिप्स फॉलो करें:

  • पहले से ही जानवर बुक कर लें, क्योंकि त्योहार के दिन कई लोग एक साथ खरीदते हैं।
  • भोजन की योजना बनाएं—बिरयानी, कबाब, हलवा आदि लोकप्रिय विकल्प हैं।
  • ज़रूरतमंदों को देने के लिये स्थानीय चैरिटी या मुसलमान संगठनों से संपर्क रखें।
  • सफ़ाई और स्वच्छता का ख़्याल रखें, खासकर क़र्बान के बाद के सफ़े‑सफ़ाई में।

ईद‑अल‑अधा सिर्फ एक त्यौहार नहीं है; यह भाईचारे, दया और एकजुटता का संदेश देता है। अपने आसपास के लोगों को बुलाकर या सामाजिक मीडिया पर तस्वीरें शेयर करके इस भावना को फैलाया जा सकता है। आप भी अगर अपनी ईद की ख़ास यादगार बनाना चाहते हैं तो इन आसान कदमों को अपनाएँ।

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जून, 17 2024
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बकरीद, जिसे ईद-अल-अधा भी कहा जाता है, इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है। इसका महत्व पैगंबर इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल से जुड़ी बलिदान की कहानी में निहित है। इस दिन को मुसलमान बकरे की कुरबानी देकर, परिवार, दोस्तों और गरीबों में मांस बांटकर मनाते हैं। यह त्योहार बिहार और पूरे भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

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